सऊदी अरब पर हुए एक बड़े हमले के बाद, जिसे हूती विद्रोहियों की ओर से किया गया बताया जा रहा है, तथाकथित 'सुन्नी नाटो' रक्षा गठबंधन की पहली वास्तविक परीक्षा सामने आई है। यह हमला समझौते पर हस्ताक्षर होने के ठीक एक महीने बाद हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, समझौते में शामिल दोनों प्रमुख साझेदार देशों—पाकिस्तान और तुर्की—ने इस हमले के बाद सैन्य रूप से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। दोनों देशों की प्रतिक्रिया केवल हमले की निंदा करने तक सीमित रही, जबकि उम्मीद की जा रही थी कि रक्षा समझौते के तहत सैन्य सहयोग या समर्थन देखने को मिल सकता है। दोनों देशों की इस 'सैन्य निष्क्रियता' ने इस गठबंधन की व्यावहारिक प्रभावशीलता और इसके तहत दी गई प्रतिबद्धताओं की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।