पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले ने एक विश्लेषण में तर्क दिया है कि चीन अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति में 'ग्रे-जोन' दृष्टिकोण अपनाता है, जिसमें वह सीधे युद्ध की स्थिति पैदा किए बिना रणनीतिक अवसरों की प्रतीक्षा करता है और तब सैन्य दबाव बनाता है जब परिस्थितियां उसके अनुकूल हों। गोखले के अनुसार, इस रणनीति को देखते हुए भारत को यह मान लेना चाहिए कि चीन के साथ संबंध निकट भविष्य में पूरी तरह सामान्य नहीं होंगे, बल्कि एक प्रकार का 'सशस्त्र सह-अस्तित्व' कायम रहेगा, जिसके लिए भारत को अपनी रणनीतिक और सैन्य तैयारियों को उसी अनुसार ढालना होगा। स्रोत सामग्री में इस तर्क के पीछे के विस्तृत आधार, ठोस उदाहरण या समयसीमा का उल्लेख नहीं है, इसलिए यह विश्लेषण मुख्यतः एक रणनीतिक दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया गया प्रतीत होता है।