रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान स्क्वाड्रन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है। भारतीय वायुसेना फिलहाल 114 राफेल लड़ाकू विमानों की आपूर्ति और स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के पूरा होने का इंतजार कर रही है, जिससे स्क्वाड्रन की संख्या में कमी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और रूस के बीच Su-57 को लेकर कोई भी संभावित सौदा इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत अमेरिका की तरफ से लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों (सैंक्शन) के जोखिम को किस तरह संभालता है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऐसा कोई सौदा अभी तय हुआ है या केवल चर्चा के स्तर पर है।