एक महत्वपूर्ण अध्ययन में सामने आया है कि श्रीनगर की झेलम नदी और प्रसिद्ध डल झील में प्रतिदिन लगभग 147 मिलियन लीटर अनुपचारित सीवेज छोड़ा जा रहा है। यह दोनों जलस्रोत कश्मीर के लिए जीवनरेखा माने जाते हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ लाखों लोगों की आजीविका के लिए भी अहम हैं। अध्ययन के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अनुपचारित सीवेज का लगातार बहाव इन जलस्रोतों के पारिस्थितिक संतुलन को गंभीर रूप से बिगाड़ सकता है, जिससे संभावित पारिस्थितिक पतन (इकोलॉजिकल कोलैप्स) की आशंका जताई जा रही है। डल झील, जो पर्यटन और स्थानीय समुदाय की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रही है, तथा झेलम नदी, जो श्रीनगर शहर की जल आपूर्ति और जल निकासी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है, दोनों पर इस संकट का सीधा असर पड़ रहा है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में अध्ययन करने वाली संस्था, आंकड़ों के स्रोत और समयावधि का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन यह आंकड़ा कश्मीर में जल प्रदूषण की गंभीरता की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि समय रहते सीवेज ट्रीटमेंट और प्रबंधन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इन जलस्रोतों को अपरिवर्तनीय क्षति पहुंच सकती है।