कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी से भारत के भुगतान संतुलन, रुपये की विनिमय दर और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि, स्रोत में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर कब और किस हद तक पड़ेगा।