रामगंगा और बहगुल नदियां तटीय गांव कसारी में उपजाऊ जमीन काटती हुई अब तेजी से गांव की आबादी की तरफ बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि अब तक करीब 150 बीघा जमीन नदी की धारा में समा चुकी है। लगातार हो रहे कटाव के चलते किसानों की खड़ी फसलें भी खतरे में आ गई हैं, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में अपनी फसल जानवरों को खिलानी पड़ रही है। ग्रामीणों में नदियों के बढ़ते रुख को लेकर चिंता है, क्योंकि अगर कटाव इसी रफ्तार से जारी रहा तो गांव की आबादी वाले हिस्से को भी खतरा हो सकता है।