रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के युद्ध में तकनीकी नेतृत्व रणनीतिक लाभ तय करेगा। उन्होंने कहा कि डीआरडीओ और उद्योग जगत के बीच साझेदारी को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए अनुसंधान के क्षेत्र तक विस्तारित किया जाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने इस दौरान एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) और स्टार्ट-अप्स की भूमिका पर विशेष जोर दिया, यह संकेत देते हुए कि रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए इन इकाइयों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।