भारत ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य सदस्य देशों का समूह) का उपयोग एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। इसके साथ ही नई दिल्ली पश्चिमी देशों और रूस दोनों के साथ अपने मजबूत संबंधों को बनाए रखना चाहती है। भारत की प्राथमिकता अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार लाना और विकासशील देशों को वैश्विक मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व दिलाना है। हालांकि, नई दिल्ली यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ब्रिक्स एक पश्चिम-विरोधी गुट में तब्दील न हो जाए। साथ ही भारत की यह भी कोशिश है कि इस समूह में चीन का दबदबा न बढ़े। इस तरह भारत ब्रिक्स के भीतर एक संतुलनकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें वह वैश्विक व्यवस्था में सुधार की वकालत तो करता है, लेकिन किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह जुड़ने से बचता है।